बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन ने वीडियो के ज़रिये लॉन्चिंग की अपनी पूजा थीम

 

अक्सर लोग यही समझते हैं कि शोला का मतलब है थर्मोकॉल. लेकिन ये सरासर गलत है. शोला एक नेचुरल प्रोडक्ट है,वही थर्मोकॉल एक आर्टिफीसियल प्रोडक्ट है. और जहां तक हमे पता है कि शोला शिल्प ख़त्म होने की कगार में है, और वैसे में हमने डायमंड हारबर से 15 किलोमीटर की दूरी में बसे एक गांव को खोंज निकाला जहां शोला शिल्प से जुड़े हुए लोग बस्ते हैं,और फिर शुरू हुई बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन पूजा की थीम जो पूरी तरह से शोला पर निर्भर है,जी हां, आज महानगर स्थित डीकेएस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन पूजा के जनरल सेक्रेटरी अंजन उकील ने उपरोक्त बातें कही.

उन्होंने आगे कहा, पंडाल के अंदर की सज्जा पूरी तरह से शोले से की गई है.
कार्यक्रम के दौरान शोले से सजाई गई मंडप को लेकर एक तथ्य चित्र भी पेश किया गया.


वही मौके पर उपस्थित उपरोक्त पूजा के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी श्री सप्तर्षि बासु ने कहा, उम्मीद करता हूं कि सभी को बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन पूजा की थीम बेहद पसंद आएगी.
आपको बता दे , इस बार बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन की पूजा 68 वें वर्ष में पदार्पण कर रही है.
मौके पर श्री अमिताभ सिन्हा,प्रेजिडेंट-बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन,अमिताभ विश्वास,आरएसएम ईस्ट,जिओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड,श्री दिब्येंदु नंदी ब्रांडिंग हेड ईस्ट जोन, जेएसडब्ल्यू सीमेंट लिमिटेड सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *