पिछले तीस साल से

निमेष अपने बूढ़े पिता को वृद्धाश्रम एवं अनाथालय छोड़कर वापस लौट रहा था. उसकी पत्नी ने उसे यह सुनिश्चित करने के लिए फोन किया कि पिता त्यौहार वगैरह की छुट्टी में भी वहीं रहें और घर न चले आएं.
अनिमेष पलट के गया, तो उसने देखा कि उसके पिता वृद्धाश्रम एवं अनाथालय के प्रमुख के साथ ऐसे घुलमिलकर बात कर रहें थे जैसे वे एक दुसरे को बहुत पहले से जानते हों और उनके बहुत पुराने और प्रगाढ़ सम्बन्ध हों. तभी उसके पिता अपने कमरे की व्यवस्था वहां से चले गए.

अपनी उत्सुकता शांत करने के लिए अनिमेष ने अनाथालय प्रमुख से पूछ ही लिया… आप मेरे पिता को कब से जानते हैं?
मुस्कुराते हुए प्रमुख ने जवाब दिया ..पिछले ३० साल से जब वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आये थे.

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