मेरा सवाल ये है कि स्वाधीनता या मानविकता,किसको अग्राधिकार मिलनी चाहिये : शंखो घोष

१९३४ में कवी गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की एक नावेल चार अध्याय से प्रेरित होकर निर्देशक शंखो घोष ने एक एक्सपेरिमेंटल हिंदी फीचर फिल्म “अतिन एला एन्ड चार अध्याय” बनाया था. हाल ही में महानगर स्थित मुक्ति वर्ल्ड में इस फिल्म का प्रीमियर हुआ. इस फिल्म में अभिनेत्री तृष्णा मुख़र्जी और अभिनेता संदीप मिश्रा मुख्य भूमिका में है. फिल्म के निर्माता सुमना मुख़र्जी हैं. पूरी फिल्म में नक्सालाइट मूवमेंट के बीच एक प्रेम कहानी को दिखाया गया है.

अभिजीत,सुदेष्णा, शंखो, सुमना सहित अन्य लोग

फिल्म कि स्क्रीनिंग के दौरान उपस्थित निर्देशक शंखो घोष ने फिल्म के बारे में बातचीत करते हुए भारतमित्र अख़बार से कहा, कवी गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की नावेल चार अध्याय में यह कहा गया था कि १९३४ में जो आतंकवाद का परिदृश्य था कि हमारे देश के नवजवान समझते थे कि अंग्रेज़ों से लड़ने के लिए हथियार उठा लेना ही सबसे बेहतरीन हल है. पर सही मायने में ऐसा नहीं था. ऐसा करते हुए वे गलत राजनीति के शिकार हो जाते थे. कुछ ऐसा ही मैंने अपनी फिल्म में दिखाया है. ऐसा करते हुए अक्सर नवजवान अपने रास्तों से भटक जाते थे. उनके अंदर से प्यार,मानविकता, दोस्ती जैसी चीज़े ख़तम होते हुए दिखाई देती थी. आज भी हमारे समाज में कुछ ऐसा ही हो रहा है. आज भी लोग बिना कुछ सोचे समझे माओइस्ट बन रहे हैं. लेकिन नक्सालाइट मूवमेंट कुछ अलग ही था. वह महज़ सिर्फ किसी के भावनाओं की वजह से सींचा नहीं गया था.

सुमना
शंखो ने आगे कहा, जिस तरह रविंद्रनाथ टैगोर सोचते थे कि मानविकता पहले दर्ज़े में आती है या स्वाधीनता ? मेरे भी वही प्रश्न है कि स्वाधीनता सबसे आगे है या मानवता अथवा स्वाधीनता आगे या राजनीती ?

शंखो से जब पुछा गया कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान किसी यादगार लम्हे को सांझा करना चाहते हैं, के जवाब में उन्होंने कहा, इस फिल्म में अभिनेत्री तृष्णा के ऊपर एक न्यूड सीन फिल्माया गया था. और उस दौरान तूफ़ान आने की वजह से पूरा माहौल और भी सुन्दर हो गया था.

आपको बता दे, शंखो की आनेवाली फिल्मों में जीरो प्रमुख है.
मौके पर निर्देशक सुदेष्णा, अभिजीत, सुमना सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे.

 

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