हक़ के लिए है एग्जीबिटर्स,प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स की लड़ाई

श्री सुभाष सेन, डिप्टी चेयरमैन,एग्ज़िबिटर सेक्शन-इआईएमपीए का कहना है कि जीएसटी के लागू होने के बाद एग्जीबिटर्स,प्रोड्यूसर्स एवं डिस्ट्रीब्यूटर्स को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है. राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशिका के अनुसार एग्जीबिटर्स द्वारा 7 प्रतिशत टैक्स की छूट दर्शकों को दी जाती है. लेकिन मुद्दे की बात तो यह है कि पोर्टल के लिए 18 प्रतिशत एवं 28 प्रतिशत टैक्स देने के अलावा कोई स्पेस है ही नही. और इसी के चलते टिकटों के दाम अनुसार एग्जीबिटर्स को 11 से 12 प्रतिशत टैक्स अपने पॉकेट से देना पड़ता है. सो देखा जा रहा है कि 11 प्रतिशत टैक्स दर्शकों से लेकर 18 प्रतिशत टैक्स जमा करना पड़ रहा है. इसी मुद्दे को लेकर राज्य सरकार का दरवाजा हमने कई बार खटखटाया है. राज्य सरकार ने यह आश्वासन भी दिया था कि जीएसटी के लिय लग रहे यह डिफरेंस अमाउंट एग्जीबिटर्स को लौटाए जायेंगे. लेकिन पिछले 10 महीनों के अंदर कोई भी नतीजा सामने आया नही.

उन्होंने आगे कहा , हम लोग चाहते हैं कि जीएसटी के नियमानुसार पुरे के पूरे 18 प्रतिशत टैक्स की छूट हमारे खाते में आना चाहिये ताकि हम वही 18 प्रतिशत टैक्स पोर्टल के लिए जमा कर सके.

सेन का कहना है, उपरोक्त चीज़ों की वजह से डिस्ट्रीब्यूटर्स एवं प्रोड्यूसर्स को भी वक़्त पर पेयमेंट नहीं मिल पाता है.

सेन ने कहा, पुरे पश्चिम बंगाल में लगभग 375 से भी ज़्यादा सिनेमाघर हैं और अगर राज्य सरकार उनकी देखभाल के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठातीं है तो वह भी लुप्त हो जाएंगी.

मालूम हो कि जीएसटी के लागू होने के बाद एग्जीबिटर्स को जो सर्विस टैक्स मिला करता था वह पूरी तरह से बंद हो गया है. यहां तक कि हॉल रेनोवेट करने के लिए जो सब्सिडी मिलता था वह भी बंद कर दिया गया है.

हाल ही में यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान सेन ने उपरोक्त बातों का खुलासा किया है.

कार्यक्रम के दौरान सेन के अलावा ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन के वाईस प्रेजिडेंट,ट्रेजरर,सेक्शनल चेयरमैन,डिप्टी चेयरमैन सहित संस्था के 100 से भी ज़्यादा लोग मौजूद थे.
एग्जीबिटर्स को राज्य सरकार कब यह पैसे लौटाएगी यह तो वक़्त ही बतायेगा.

 

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