१ दिसंबर को रिलीज़ होगी VIRAAM

“चाह गई चिंता मिटी मनवा बेपरवाह,
जाको कुछ न चाहे वही शहंशाह”-नरेंद्र झा

हाल ही में कान फिल्म फेस्टिवल में अभिनेता नरेंद्र झा अभिनीत फिल्म विराम का स्क्रीनिंग हुआ. फिल्म १ दिसंबर 2017 को सभी सिनेमाघरों में रिलीज़ होनेवाली है. फिल्म के प्रचार के उद्देश्य से गत सोमवार को अभिनेता ने महानगर का दौरा किया. इस दौरान उनसे हमारी एक खास मुलाक़ात हुई. तो लीजिये पेश है उनसे की गई बातचीत के मुख्य अंश-

विराम में अपने चरित्र के बारे में कुछ बताये.
– इस फिल्म में मैं एक उद्योगपति अविराज मल्होत्रा के किरदार में हूं. अविराज की कई सारी फैक्ट्रियां हैं और वह चैरिटी में काफी विश्वास करता है. इन सब से इतर उसकी पत्नी की एक अस्पताल खोलने की इच्छा है. लेकिन एक स्थिति ऐसी आती है, जब उसकी पत्नी का  निधन हो जाता है. इसके चलते अविराज काफी मायूस हो जाता है. तभी उसकी ज़िन्दगी में किसी और की एंट्री होती है. और फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है.

नरेंद्र झा  (छायाकार: राजीव विश्वास)

अविराज मल्होत्रा का किरदार निभाने के लीये क्या आपने कोई अन्वेषण किया है?
-बॉलीवुड फिल्म घायल वन्स अगेन में मैंने ऐसा किरदार निभाया था. वैसे एक कहावत है न ” शहर सिखावे कोतवाली”. शहर का निर्माण होते ही कोतवाल तैयार हो जाता है.

फिल्म में आपने मोनिका और उर्मिला के साथ स्क्रीन शेयर किया है, उनके बारे में कुछ बताये.

– उर्मिला एफटीआइ की छात्रा रह चुकी हैं. उसने इरानियन फिल्म डायरेक्टर मज़ीद मजीदी की एक फिल्म में काम किया है. माझी – दी माउंटेन मैन में वह सेकंड लीड कर चुकीं हैं. सच कहिये तो उसमें सिखने की एक ललक है.
जहां तक मोनिका की बात आती है वह ग्लैमरस होने के साथ-साथ काफी सकारात्मक भी हैं.

ज़ियाउल्लाह खान के निर्देशन के बारे में बताएं
– वे कमाल के निर्देशक है और उनको फिल्म बनाने की परख है.

विराम को कान फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया है.कैसा लग रहा है?
तारीफ के साथ क्रिटिसिज्म को अपनाने की कोशिश करूंगा

फिल्म देखने के बाद आपको कोई सन्देश मिला है.
-इंस्टाग्राम या फेसबुक पर आया है, पर ऐसी चीज़ों को मैं तवज़्ज़ो नहीं देता. फिल्म के  रिलीज़ होने की प्रतीक्षा कर रहा हूं.

कोई भी किरदार निभाने से पहले अपने आप को किस तरह तैयार करते हैं ?
– स्क्रिप्ट की लाइंस मुझे किरदार तक पंहुचा देती है. एक्टर का एक क्राफ्ट होता है ,जब भी वह आंखें मूंद कर कुछ सोचने लगता है, उसी वक़्त उसके सामने उसकी छवि तैयार हो जाती है.
“कवी वहां तक पहुंच जाता है, जहां रवि नहीं पहुंच पाता है.”

कोई खास किरदार निभाने की इच्छा रखते हैं.
-अब तक मैंने 50 टेलिविज़न सीरीज , 45 फीचर फिल्म और 200 एड फिल्म किया है. पर मेरा हमेशा मानना है,बेगर्स आर नॉट दी चुज़र्स.

वह कौन सा ख्वाब है जिसे आप हमेशा से  देखते हुए आ रहे हैं?
-मेरी सोच है,चाह गई चिंता मिटी, मनवा बेपरवाह,
जाको कुछ न चाहे वही शहंशाह. सब बढ़िया चल रहा है.

आपकी सोच काफी सकारात्मक है.
-संतुष्टि ही जीवन है,छोटा कर के देखिये जीवन का विस्तार,
आँखों भर आकाश है,बाहों भर संसार.

क्या आप में कोई नकारात्मक सोच भी है?
-लोगों की बड़ी-बड़ी बातों से मेरी नाराज़गी है.
सद्गुरु के अनुसार कोई भी नई चीज़ की शुरुआत से पहले विराम की आवश्यकता है.
बढ़ते चलो, बढ़ते चलो..बैठ के कुछ सोचो तो बात बनेगी, ये पंकितियां कवी जान निसार अख्तर जी की हैं. और मैं इन चीज़ों को काफी मानता हूं.

अगर आपको ज़िन्दगी की शुरुआत करने का दूसरा मौका दिया जाये. तो किस तरह उसकी शुरुआत करेंगे.

एक अभिनेता बनकर ही शुरुआत करना चाहूंगा.

इंडस्ट्री में आपका कोई पसंदीदा निर्देशक.
– विशाल भारद्वाज, आशुतोष गवारिकर, श्याम बेनेगल और मोहित जैसे कई निर्देशकों के साथ मुझे काम करने का मौक़ा मिला है. अब इतना सा ख्वाब है कि जिसको मेरे साथ काम करना है बेशक मुझे याद करे,बंदा हाज़िर हो जाएगा.

किसे अपना आदर्श मानते हैं?
– मेरे स्वर्गवासी पिताजी को

महानगर की कौन सी चीज़ आपको अच्छी लगती है?
– टेक्नोलॉजी, जो ग्लोबली आपको बांधे हुए रखती हैं.

आपकी आनेवाली परियोजनायों के बारे में बताएं.
-मेरी आनेवाली फिल्मो में ‘दीे मैसेज’ खास है.

आपके चाहनेवालों के नाम कोई सन्देश देना चाहेंगे.
– मुझसे कोई गलती हो जाये तो बताने से जरा भी न हिचकिचाये. 1 दिसम्बर 2017 को विराम देखने का कष्ट अवश्य करें.

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