पैसा-MONEY

क सोशल नेटवर्किंग साइट के ज़रिये उस लड़की से मेरा परिचय हुआ था. उन दिनों मैं एक मीडिया हाउस में नौकरी किया करता था. और वह महानगर के एक नामचीन कॉलेज में पड़ती थी. उसे मेरा मीडिया में जॉब करना बेहद पसंद था. अपनी पढ़ाई ख़त्म करने के बाद वह भी इसी प्रॉफ़ेशन में आना चाहती थी. वक़्त बीतता गया. हम दोनों करीब आने लगे. और वह भी अपने मकसद को हासिल करने के लिए जी जान से जुट गई. अंत में वैसा ही हुआ जैसा कि वह चाहती थी. उसे महानगर के सबसे बड़े मीडिया हाउस में नौकरी मिल गई. धीरे-धीरे उस से मेरा मिलना कम हो गया. वजह, उसकी नौकरी नई थी. शायद कोई मेरे साथ उसको देख ले,नौकरी जाने का खतरा भी था. ऐसा वह समझती थी. जो भी हो दोनों में दूरियां बढ़ती गई. एक वक़्त था जब वह मुझ पर जान छिड़कती थी. उसके पास पैसे नहीं हुआ करते थे, फिर भी किताबें बेचकर वह मेरे लिए तोहफे लाया करती थीं. घंटों बीत जाते थे बात करते-करते.
पर नौकरी मिलने के बाद शायद पैसों ने उसका दिल जीत लिया था.पैसे ! नज़दीकियां और दूरियां दोनों को साथ-साथ लेकर चलती है, शायद ये मैं भूल चूका था. यकीन तो तब हुआ जब वह मेरी ज़िन्दगी से पूरी तरह जा चुकी थीं.

वैसे एक चीज़ तो मैं आपको बताना ही भूल गया था. जिस मीडिया हाउस में मैं नौकरी किया करता था और जिसे देख वह मुझ पर ऐतबार करने लगी थीं. आख़िरकार उसे उसी संस्था में नौकरी मिल जाती है. इत्तफ़ाक़ से इंटरव्यू के दिन मैं ही उसका हाथ पकड़कर उसे उस दफ्तर तक पहुंचाया था.

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