NAVODAYA की पेशकश “बादोल मेघे मादोल बाजे”

वी रवीन्द्रनाथ ठाकुर एवं काज़ी नज़रुल इस्लाम की रचनाओं को लेकर आये दिनों महानगर में कुछ न कुछ होता ही रहता है. और इस बार एनजीओ नवोदया ने वर्षा ऋतू के स्वागत के लिए उनकी रचनाओं का इस्तेमाल गानों,नृत्यों एवं व्यक्तव्यों के माध्यम से किया. जी हां, गत शनिवार को महानगर के जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित डॉ. त्रिगुणा सेन ऑडिटोरियम में उपरोक्त कार्यक्रम का आयोजन किया गया था,जिसका नाम “बादोल मेघे मादोल बाजे” दिया गया. मौके पर संस्था से जुड़े सभी ने नृत्य एवं संगीत परिवेषण के साथ-साथ अपने व्यक्तव्य को पेश किया.

कार्यक्रम का एक दृश्य (फोटो: बुलान)

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रीमती सुमिता भट्टाचार्या ने हॉलीबॉलीटाली डॉट कॉम से अपनी संस्था के बारे में बातचीत करते हुए कहा, मेरे संस्था का का नाम नवोदया वेलफेयर सोसाइटी है, जो पिछले ६ महीनों से गरीब बच्चों के लिए रोजगार का एक जरिया बनी हुई है.

उन्होंने कहा, फिलहाल संस्था में १० से ११ बच्चे मौजूद हैं. मैं प्रयास कर रही हूं कि इनकी माताएं भी संस्था से जुड़े. फ़िलहाल कुछ लोग अगरबत्ती, टी-शर्ट बनाने जैसे कामों में लगे हुए हैं. उम्मीद करती हूं कि आनेवाले दिनों में इनकी संख्या में और बढ़ोत्री होगी.

सुमिता ने कहा, संस्था से जुड़े श्रीमती इन्द्राणी बासु, जयेश्नु बासु,स्वपन कुमार हाती, निताई और दुर्गा का नाम उल्लेखनीय है.
कार्यक्रम के दौरान कई लोग मौजूद थे.



नृत्य परिवेषण करते हुए संस्था के बच्चे

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